गुरुवार, जून 30, 2016

ज़ुर्म मुसलसल करती हूँ। ..


ग़र  ये  ज़ुर्म  है  तो  ,
मुसलसल  करती  हूँ  !
ज़ायदाद   ज़मीर  की  ,
तुझे बेदखल  करती  हूँ!
 ______________डॉ . प्रतिभा  स्वाति 



सोमवार, जून 27, 2016

mushkil h hindi type filhal

 दो  दिन  से  हिंदी  टाइप  का  ऑप्शन  इंस्टॉल  नहीं  कर  पा  रही  ( google  input  tools  ) क्यूंकि  hindi  india  unstol  नहीं  हो  रहा  . अब  ऑनलाइन  टाइप  करके  कॉपी  पेस्ट  कर  सकती  हूँ  . टीम  विवर  की  मदद  से  शायद  मैं  अपने  एक्सपर्ट्स  की  सहायता  ले  सकूं।
  

शनिवार, जून 18, 2016

ज़िंदगी के हिसाब ....


______________ कितना अजीब है जीवन मुसलसल , औसतन , पहले की बनिसबद छोटा और महंगा  होता  जा रहा है . प्राथमिकताएँ  तेजी से बदल रही हैं . नैतिक मूल्यों का अवमूल्यन  हो रहा है . जो   चीज़ें   कुदरतन हमें नेमत की तरहा  हासिल थीं हम उन्हें  खोते जा रहे हैं , मसलन  हवा और पानी !
___________ रोटी -कपड़ा और मकान से काम नहीं चल रहा . सब कुछ इस कदर मशीनी हो गया है , वो दिन दूर नहीं जब हम mob और tv को अपनी बॉडी में ट्रान्स्प्लान्ट करवाना  चाहेंगे ! कुल मिलाकर  मतलब परस्ती के इस दौर में लाभ और लोभ के गणित ने ज़िंदगी के सारे  समीकरण  चौपट कर दिए  हैं !
_____________________ डॉ . प्रतिभा स्वाति  

मंगलवार, जून 14, 2016

कौन पढ़ता है अब किताबें ?

 ज़िंदगी  के  मसले -मसाइल 
अब हिसाबी हो गए हैं !
कौन पढ़ता है अब किताबें
ख़ुद  किताबी हो गए है !
____________________ डॉ . प्रतिभा स्वाति

शुक्रवार, जून 03, 2016

साहिल पे खड़े हो .....










my e-book: तोड़ देती हूँ वो रिश्ता ....: ( पूरी कविता के लिए link )
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सुकूं दिल को मिलता  नहीं ,
 सम्मान दांव पर जब हो !
 हाथ में मरहम दिखावा  हो ,
 नमक , घाव  पर जब हो
______________________________ डॉ.प्रतिभा स्वाति





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गुरुवार, जून 02, 2016

बात जारी है ....

  रक्षा -कवच 
 पैने नख़ करता 
  ख़ुद मरता 
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      ये हाइकू है ?  मुझ  जैसे लोग इसे हाइकू तो कहेंगे पर पसंद नहीं करेंगे ! अरे ,कोई कवि इतना हिंसक  कैसे हो सकता है ? हिंसा -पसंद भी कैसे कर सकता है ? कवि तो कोमल व्यवहार और स्वभाव के लिए जाना जाता था !
____________ वीर और भयानक रस के कवि बिरले होते हैं ! भले रीतिकाल  गुज़र गया ,पर भूषण के वंशज उसका .1 % लेकर अब भी जीवित हैं ,काव्य सरोवर में !लिख रहे हैं श्रंगार -प्यार -व्यापार !
_इसकी तमाम वजहें हैं , मनोविज्ञान की नज़र जिनपर है !ये बात आज जारी  रहेगी _______________ देहली के वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप पंडित आगरा आए हुए हैं , मेरी खातिर ....इस विषय  पर उनकी टिप्पणी से आपको अवगत करवाउंगी !
_________________ डॉ. प्रतिभा स्वाति




कोलाज (my on line creation )

कोलाज /हाईगा


बुधवार, जून 01, 2016

राम मौन हो गए ....

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              पाठक को आज सबकुछ हासिल है , बड़ी सहजता से  google पर . वह फ़ेसबुक पर आता दोस्त बनाने, ...................और बन जाता है " writer " :) 
यहाँ असली writer को बड़ा खतरा है . रचना चोरी होने का खतरा ! लेकिन पहुँचने के बाद वह वहां बना लेता है दोस्त
___________________ तभी blog से थककर लेखक खोजता है पाठक !  blog पर सभी writer हैं :) वे आपस में अपना दायित्व निभाते हैं , मेलजोल रखते हैं ! पर  वे महज पाठक नहीं हैं !
__________ इस पूरी रामायण से थककर सीताजी ने पूछा - प्रभु ! फ़िर '  असली पाठक , लेखक, दोस्त" कौन हैं ? इसपर श्रीराम  मौन हो गए !
__________________ व्यंग्य : डॉ . प्रतिभा स्वाति





अब फ़ोटो के साथ हो सकता है ..... अच्छा और बुरा....



















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