शनिवार, फ़रवरी 21, 2015

महकती है ....मेरी किताब

  

______________________

किताबों में छुपे
फूल / अब तलक 
मुरझा गए होंगे !

उड़ गई होगी 
सारी खुशबू !

भूल गई होंगी 
पंखुड़ी हंसना !

पर वो यादें और 
कुछ वादे अब भी 
ज्यों के त्यों 
बंद हैं / उसमें !


आज / मुक्त करूं
उस फूल को 
इस किताब से !
उन यादों को ,
अपनेआप से !

यकबयक 
 खुली किताब 
हर / शब्द 
फूल बन गया !
ज़माना / क्या 
 फ़िर बदल गया ?

पहले / फूल 
शब्द हो जाते थे !
अब / शब्द 
फूल बन जाते हैं !

फूल और शब्द
इक-दूसरे के हैं
पूरक  /अपनी बात
कहते हैं / हंसकर !
महककर !

 जो भी हो 
मेरी किताब 
महकती है हरदम !
भूलकर हर सितम !
_____________________ डॉ. प्रतिभा स्वाति

मन मौन है ...


 _____________________ शरीर विज्ञान कहता है कि - मानव शरीर में  'मन' नाम का कोई अवयव नहीं , जबकि मानव तो मन के बिना कुछ भी नहीं , ये कहता है मनोविज्ञान :)
______________ हर बात का आधार जब तर्क हो / प्रमाण हों / साक्ष्य - सुबूत हों / सर्वे हों और कसौटी से निष्कर्ष निकले हों तब .....तब ? इस तब का जवाब उतना कठिन भी नहीं :) पर क्षण भर का मौन सोचने के लिए विवश करता है कि क्या मन हमेशा यूँ ही छुपकर 
मानव को अपने इशारों पर चलाता रहेगा ? इसे नियंत्रित करना क्या बहुत दुष्कर हैं ?
_________________ गीता के छठे अध्याय में बेसाख्ता अर्जुन अपनी विवशता का इज़हार , कृष्ण से कर ही बैठे - 'चंचलं ही , मन : कृष्ण .... वायोरिव च दुष्कृताम !
___________ जो भी हो मन है :)
_____________ डॉ. प्रतिभा स्वाति

गुरुवार, फ़रवरी 19, 2015

सूट के भाग ....बड़े सजनी :)

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 सूट के भाग / बड़े सजनी :)
छोटा मुंह / बात भी छोटी !
 आए तोहफ़ा दस लाख का,
नीलामी की रकम हुई कोटि !
_____________________ हाँ जी / आज जाने क्यूँ मुझे ' रसखान बहुत याद आए :)
_________________________ डॉ. प्रतिभा स्वाति

रविवार, फ़रवरी 15, 2015

ख़ामियां ... होने दो ज़ाहिर

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बुराई / नहीं है 
बुरी उतनी !
उसे / होने दो 
ज़ाहिर !
वो / ख़ुद 
तलाश लेगी 
रास्ते 
समायोजन के !
सुखद ,
आयोजन के :)
__________________ डॉ . प्रतिभा स्वाति

गुरुवार, फ़रवरी 12, 2015

जीवन ....परीक्षा है :)

_____________________ सवाल कोई नया नहीं , क्यूंकि जवाब सबके पास हैं :) सभी न सिर्फ़ जानते अपितु जीते भी हैं ! फ़िर भी .......कोई कहता है वरदान है , कोई इसे वरदान नहीं मानता ! कोई मिथ्या कहता है तो कोई खेल ....कोई तमाशा ! कोई ख़ुद को कठपुतली कहता है तो कोई ......बहरहाल जैसा भी है जीवन तो है ही :)
___________ न सिर्फ़ इन्सान पशु - पक्षी और वनस्पति में भी जीवन है ! जल और थल पर जीवन है , अनेक रूपों में ! मेरा मक़सद जीवन को परिभाषित करना तो बिलकुल ही नहीं ! आज / अभी अचानक मुझे ये लगा की जीवन एक परीक्षा ( भी / ही ) है :)
_____________ सचमुच परीक्षा जिसे ३३% लेकर जिया जा सकता है ( तृतीय श्रेणी में ) और 45 % लेकर मुस्कुराया जा सकता है , 50 % लेकर आत्मविश्वास पैदा किया जा सकता है और 60 % लेकर मान किया जा सकता है :) जब हम दूसरों के लिए ज़ुरूरी हो जाएँ तब विशेष योग्यता ( 75 % ) हासिल कर लिए समझो :)
______________ लेकिन जब पूर्णांक 100 हों / तब 33 % से कम आना अपनी काबलियत पर नाक़ाबिल होने का लेबल लगाना है ! व्यक्ति की हताशा / रुग्णता और उसका पिछड़ापन प्रमाण बन जाता है ! ऐसे में जो टॉप पर है उसके दायित्व बढ़ जाते हैं !
_____________ ज़ुरूरत है / आत्म - मुल्यांकन की !और दिशा तय किये जाने की ! हम अपेक्षा का कटोरा लिए हैं या हमारी मुट्ठी में दायित्व के खनकते सिक्के हैं ?
_________________________  हमारी कोशिश 100 में से 100 लाने की रहनी चाहिए / हमेशा :)
____________________ डॉ. प्रतिभा स्वाति


बुधवार, फ़रवरी 11, 2015

चिरायु भव :)



_____________" चिरायु - भव " ये आशीष दिया करते थे ( हैं ) बुज़ुर्ग . जब उन्हें प्रणाम किया जाता है !
आशीर्वचन तो और भी हैं _____ जैसे - ख़ुश रहो , तरक्की करो , ख़ूब पढ़ो , भगवान सद्बुद्धि दे , सब मनोकामनाएँ पूर्ण हों और ...........  पर / मैं सिर्फ़  'चिरायु ' पर ही रुकी हूँ ! आख़िर , वह आयु कम क्यूँ होती जा रही है ? क्या वज़ह है ,कि पहले 100 साल औसत आयु थी और अब 60 !
_________________  कम होने कि वजह हमारा स्वास्थ्य ( गिरता हुआ ) और गिरते हुए स्वास्थ्य की वज़ह तनाव , और तनाव की वज़ह हैं 1-2-3-4-5-----तमाम ! अर्थात कुल मिलाकर ये तनाव हमें ' चिरायु ' नहीं होने देता ! तमाम आशीर्वाद फ़िज़ूल / ज़ाया हो रहे हैं ! हमारी phisical age यदि यूँ कम हो रही है ,तब क्या mental age अप्रभावित होगी ? इस विषय पर क्या प्रयोग हुए ? क्या तथ्य सामने आए ?ये सब सिर्फ़ चिन्तन या आशीष का विषय नहीं हैं . समाज की इकाई होने के नाते यदि शुरुआत ' हम ' से हो तो अपेक्षा का कटोरा भरे  ना भरे उसका आकार छोटा ज़ुरूर हो सकता है :)
__________ हम फ़िर से विषय पर आएँगे :) आख़िर चिरायु होने के लिए शुरुआत कहाँ से और कैसे की जाए ?
____________ तमाम सारे जवाबों में से / वरीयता किसे दी जाए ? आज / अभी इतना ही ...... :)
_____________ डॉ. प्रतिभा स्वाति









मंगलवार, फ़रवरी 10, 2015

दुःख .....


_________________देखा जाए तो, हमारी हिंदी में हर शब्द का अर्थ बड़ा व्यापक और  सारगर्भित है . एक शब्द के तमाम अर्थ निकलते हैं ! तमाम पर्यायवाची होकर समानान्तर  चलते हैं . ऐसे में कई बार लेखक कहता कुछ है और समझा कुछ जाता है :)
_______________ अमूमन जब हिंदी में हाइकू लिखे जाते हैं तब ! क्यूंकि हर बार उन 3 लाइंस और 17 अक्षर की कविता की व्याख्या करना सम्भव नहीं होता ! हिंदी में बिंब हैं , अलंकार हैं शब्द- शक्तियाँ और शब्द- शैली है :) और फ़िर जब बात काव्य की हो तब , उसे तर्क पर कसना कि _______ चाँद को मामा क्यूँ कहा ? और बिल्ली को मौसी क्यूँ ? केश को घटा क्यूँ कहा और मुख को चाँद क्यूँ ?
________________ काव्य और कवि दोनों इन सवालों के समाधान प्रस्तुत कर सकते हैं ! तर्क को आधार बना सकते हैं . लेकिन किसी post के comments में अपने आप को प्रमाणित करने के लिए , यदि वक्त जाया करते हैं , तो नुकसान किसका है ?
______________ आज मुझे उसी वक्ती नुकसान की फ़िक्र है , ( जिसका ज़िक्र है ) लेकिन सवालों के जवाब देना मेरा दायित्व है ! जवाब हैं भी __________फ़िलहाल नहीं है तो सिर्फ़ वक्त ! बस इन्हीं बातों की तकलीफ़ है , दर्द है , गम है ...........और दुःख  है :)
________________ डॉ. प्रतिभा स्वाति

रविवार, फ़रवरी 08, 2015

सुख-दुःख ...साथी हैं !


__________________________________________________
 सुख - दुःख तो , साथी हैं ....
काम , सभी  को छलना है !
जैसा भी है ... जीवन-पथ....
सबको इसपर  चलना  है !
__________________ डॉ . प्रतिभा स्वाति











मंगलवार, फ़रवरी 03, 2015

परियां



                       कल्पना हमेशा खूबसूरत होती है ? आख़िर इसमें छुपा सच , हकीक़त के  कितना नज़दीक है ?




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