शुक्रवार, सितंबर 26, 2014

हाइकू : इमाम मेहँदी / मुर्दाबाद

हाइकू : इमाम मेहँदी / मुर्दाबाद:

_______________________________________________________     हिन्दुस्तान की ज़मी धन्य है / जहाँ हर मज़हब को दिल से इज्ज़त और अधिकार .........



रविवार, सितंबर 14, 2014

स्त्री....



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जीवन के 
कड़वे यथार्थ !

मीठे सपने,
जिन तक
 कभी.... नहीं
 पहुंचते हाथ !

पर .... फिर भी
 स्त्री 
होकर माँ ....
पत्नी...
बहन.... बेटी
पुरुष को हमेशा 
हर रूप में 
ख़ुशी से .....
अपनाती है !
 सपने  सजाती  है !

टूटते  हैं .....
ख़्वाब !
बिन किये ....
आवाज़ !

चूड़ियाँ ख़ामोश !
पायल चुप !

मगर फ़िर.....
 फ़िर से ...
समय...
 लेता है 
करवट ! 
वो भूल जाती है !

लेकर ....नया रंग ,
आशाएं  जगाती है !
सपने सजाती है !
________________ डॉ. प्रतिभा स्वाति







गुरुवार, सितंबर 11, 2014

मन नहीं मानता .... ' विसर्जन '



          सारे तथ्य / कथ्य /तर्क / कारण और समझाइशें ------------------- एकदम फ़िज़ूल साबित हुईं ! और मैं आज तक ,गणपति  विसर्जन नहीं कर पाई ! हाँ ... कर ही नहीं पाई !
------------- माँ ,जब तक जीवित थीं , समझाती रहीं___ वास्तु के हिसाब से भी , विसर्जन ज़ुरुरी है ! पर / नहीं ! ये मेरी ज़िद बिलकुल नहीं है ! पर विसर्जन के नाम पर रोना आ जाता है ! सारी शक्ति समाप्त -सी हो जाती है !.............. और एक दशक से ज्यादा हुआ ,  मंगल - मूर्ति की स्थापना तो होती है ---------- विसर्जित  नहीं करती !
___________ फलत: 10 से ज्यादा प्रतिमाएं हो गई हैं !जब तक हूँ / ये सिलसिला  यूँ ही जारी रहेगा ! सबसे कह दिया है ,जब मैं न रहूँ तब __________ इन सबको / सादर धूमधाम  से विसर्जित कर देना !
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