शनिवार, अप्रैल 26, 2014

भ्रमर हर ...



रस्ते नेक होने लगें तो...

  आरती  और  अजानें / अगर ,
  दोनों /  एक  होने  लगें तो !

  मज़हब कई /कई मंज़िलें,
 सब रस्ते/नेक होने लगें तो!

कोई कंस  या रावण  नहीं होगा !
रेखित सिया-आंगन नहीं होगा !

शाम / सूरज  जब  भी ढलेगा !
 हर दीप ख़ुश होकर  जलेगा !
------------------------------------ डॉ . प्रतिभा स्वाति 

बुधवार, अप्रैल 23, 2014

निर्भया ...

      कुत्सित.....  लोग !
   जिनके  दूषित  इरादे !
    या ख़ुदा !..... उनको ,
    तू......पत्थर  बनादे !!
------------------------------------- डॉ. प्रतिभा स्वाति 

सोमवार, अप्रैल 21, 2014

दीवाना

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कहता  रहा .....  रात भर ,
घूमकर  गली  में दीवाना !
आसमां पर / जाने कितने ,
उधार  हैं .............उसके !

तोड़ लेता है कुछ  सितारे लेकिन ,
चाँद /वापिस नहीँ  माँगा  उसने !
--------------------------------------- डॉ. प्रतिभा स्वाति 
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शनिवार, अप्रैल 19, 2014

समस्या ....

          
मजबूरियों   की / तकलियों  से ,
सूत  अब ..... कतता   नहीं  है ! 
कर  दिया   इनकार  शुक  ने ,
राम  ..... वह  रटता  नहीँ  है !
-------------------------------------- डॉ . प्रतिभा स्वाति 
 

शतरंज ..

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 वज़ीर  को खौफ़ / मौत  का !
शाह /शह  से  डर  जाते  हैं !
रण में /बेख़ौफ़ पियादे   हैं ,
हँसते -हँसते / मर जाते हैं !
--------------------------------- डॉ . प्रतिभा स्वाति 
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गुरुवार, अप्रैल 17, 2014

मन का काम / मचलना है ...



 मन का  काम / मचलना  है !
  सब  ऐसे  ही /  चलना  है !

दीन- धरम की /बातें  छोड़ !
कलयुग में बस / छलना  है !

उगना  है / पूरब   ही  से !
और पश्चिम  में ढलना है!

सदियों  से है / तपता  सूरज !
किस्मत  उसकी  जलना है !
------------------------------------- डॉ . प्रतिभा स्वाति

फ़रेब देने वाले ...


  फरेब..........देने  वाले !
खामियां गिनते  रहे ! 
भूले  से / कसीदा  कब ?
किसकी  शान  में कहा ?

मुकर जाती है / जुबां कैसे ?
अपने ही कहे लफ़्जों  से !
इबारत को दिलासा  देके ,
लिखे  हुए पैगाम ने कहा !
----------------------------------- डॉ. प्रतिभा स्वाति
  

मंगलवार, अप्रैल 15, 2014

कह दिया .....



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दम्भ  के  सारे ..... तराजू !
सिक्के अहम के.. खोटे हैं !

कैसे कह दिया फलक ने ?
तारे  कितने ......छोटे  हैं !

---------------------------------- डॉ.प्रतिभा स्वाति
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सोमवार, अप्रैल 14, 2014

भ्रम /1


भ्रम / भरमाते  हैं !
कभी / हरिण  को ,
मरीचिका  बनकर !
  कभी / या अक्सर ? 
उसे /मारीच बनकर !

हम  सबके भीतर ,
एक हरिण जिन्दा है !
जानता है यथार्थ ,
खुदसे / शर्मिंदा है !
-------------------------------- जारी
------------------------------------- डॉ. प्रतिभा स्वाति



शुक्रवार, अप्रैल 04, 2014

मेरे नाम ने कहा --



   

         नेट  प्रोब्लम होने से / g + पर मै थंक्स तक नहीं कह पाई ! आप सभीके कमेंट्स के लिए ! m v sry .
       सिर्फ़ ब्लॉग ही open हुआ , आज भी !
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शिव / (हाईगा कोलाज़ )



          सच कहूँ तो / इन सब haiga को सहेजने और यूँ संवारने के दौरान  मुझे ' पूजा - भाव ' की अनुभूति हुई !
जाने क्यूँ मन छलक -सा पड़ा !
                      मुझे मालूम है --------- साहित्य / प्रेम / भक्ति / योग / इन सबकी अवस्थाओं को   ८ से ११  चरणों में 
    व्यवस्थित किया गया है ! 
                     और मैं / प्रथम सोपान पर ही ------- डगमगाने लगी / ठहर  गई / मौन हो गई / शायद  रिक्त भी ------------- !!!
   ------------------------  डॉ . प्रतिभा स्वाति




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