शनिवार, फ़रवरी 22, 2014

मन पूछता है बस ...



     मन पूछता है / बस !
कभी/उत्तर नहीं देता


उत्तर   ही की ख़ोज में,
प्रश्न /ले जाते हैं/उसे ,
बियाबान में / बीहड़ में!
उन अकेली / अँधेरी ,
कंदराओं.............. में! 

जहां  
हर श्वास 
 लीन हो जाती है
अटूट ध्यान में
 हो जाता है
 संसार  विस्मृत 
जागती है कुण्डलिनी शक्तियाँ ?
 भ्रमित करती हैं अष्ट सिद्धियाँ ?
तब - यम, नियम  प्राणायाम 
 प्रत्याहार ,ध्यान और  धारणा
 मन को कर देते हैं मौन ,
 जाग उठता है सहस्त्रार
 चिर निद्रित समाधि के बाद
 कौन लौटा है चिर प्रतीक्षित 
प्रश्नों को
 उत्तरों से संतुष्ट करने
 आज भी प्रश्न
 मन को ले जाते हैं
 उत्तर की ख़ोज में 
और उत्तर हर बार की तरह
 नहीं लौटते प्रश्नों के पास .......

                                          डॉ. प्रतिभा स्वाति    
                                                    



बुधवार, फ़रवरी 19, 2014

online yoga by Dr. pratibha sowaty



योग
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1-- आपको बस कमेंट्स में अपना नाम , mob no, व्यवसाय, उम्र , शिक्षा , वज़न और ऊंचाई की जानकारी देनी होगी  .
2.--अपनी अपेक्षा , क्षमता ,और योग संदर्भित ज्ञान से अवगत  करवाना होगा .
3.--कॉमेंट्स ही  में आपको yoga सिखाने की कोशिश की जाएगी , नई post के माध्यम से 

_______________ डॉ. प्रतिभा स्वाति 
_______________ ( योग - विशेषग्य )
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16 जून / 2015.... विश्व योग दिवस
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फूलों की चोरी बुरी बात है और उससे  भी ज्यादा बुरी बात है खुशबू चुराने की कोशिश ! नाकामयाब कोशिश !क्यूंकि खुशबू छुपाना मुमकिन नहीं ! विचार उसी सुगंध की मानिंद हैं , जिनका प्रसार ज़ुरूरी है , पर तरीका सही होना चाहिए तब ही देश और समाज का भला होगा !
आज इतना ही ....आगे की बात , कल :)
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लिखा  इन्द्रधनुष
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     मै  खूब पहचानती हूँ !
ख़ुद में छिपे
 उस ' चितेरे ' को !

अफ़सोस / कभी भी
उसे / नहीं दे पाई ,
रंग और तूलिका !

तब / वह चित्रकार 
बन गया लेखक :)
मुझसे पूछे बिना !

कागज़ पर शब्द ,
कब / कौनसा रंग  
जमाएँगे / मुझे 
ख़ुद पता नही होता !

बस / इक रंग 
सियाही  का नीला !
बना देता है / आसमां पे
सौ / इन्द्रधनुष !
----------------------------- डॉ . प्रतिभा स्वाति

2 बातें






 मुद्दतें  हुई / ख़ुद  से  मुलाक़ात हुए :)

 ज़िन्दगी / मोहलत पल भर तो मिले !


कहनी - सुननी हैं / दो बातें  मुझको !

काश  मुझको / मेरा  घर तो   मिले !

---------------------------- डॉ. प्रतिभा स्वाति



गुरुवार, फ़रवरी 13, 2014

खुले क़िताब तब ....

 
      जब  भी खुली !
 यादों की  क़िताब !
कुछ  फूल हंसे,
उड़ी  खुशबू ,
महका  मन !

और  / मै / फिर से ,
कल के लिए ,
हर पल के लिए !
पोंछकर / अश्क ,
बो देती हूँ , इरादे !
कुछ हसीन  वादे !

आज की क़िताब ,
कल / खुले जब !
महके फिर  मन !
हंसे  /आंगन !
------------------------- डॉ. प्रतिभा स्वाति 

सोमवार, फ़रवरी 10, 2014

दर्द..



   सबके   अपने ज़ख्म  / अपने  मरहम  हैं !
   हर किसी के दामन् में / खुशियाँ  कम हैं ! 

लहलहाता दरख्त / कल  दोपहर ही  कटा  है !
देखिये दूब की आँखों से /बह रही  शबनम है !
--------------------------------- डॉ . प्रतिभा स्वाति










मंगलवार, फ़रवरी 04, 2014

बसंत पंचमी / :)



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 हिन्दु कैलेण्डर के अनुसार प्रत्येक वर्ष माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को वसंत पंचमी के रुप में मनाया जाता है. भारत में छ: ऋतुओं को मुख्य रुप से मनाया जाता है. पतझड़ ऋतु के बाद वसंत ऋतु का आगमन होता है. हर तरफ रंग-बिरंगें फूल खिले दिखाई देते हैं. खेतों में पीली सरसों लहलहाती बहुत ही मदमस्त लगती है. वसंत पंचमी का दिन बहुत ही शुभ माना जाता है. वसंत पंचमी से पांच दिन पहले से वसंत ऋतु का आरम्भ माना जाता है. चारों ओर हरियाली और खुशहाली का वातावरण छाया रहता है. इस दिन को विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है. इसलिए विद्यार्थियों के लिए विद्या आरम्भ का मुहूर्त बहुत ही श्रेष्ठ मुहूर्त होता है. जिन व्यक्तियों को गृह प्रवेश के लिए कोई मुहूर्त ना मिल रहा हो वह इस दिन गृह प्रवेश कर सकते हैं. कोई व्यक्ति अपने नए व्यवसाय को आरम्भ करने के लिए शुभ मुहूर्त को तलाश रहा हो तब वह वसंत पंचमी के दिन अपना नया व्यवसाय आरम्भ कर सकता है. अन्य कोई भी कार्य जिनके लिए किसी को कोई उपयुक्त मुहूर्त ना मिल रहा हो तब वह वसंत पंचमी के दिन वह कार्य कर सकता है.
पतझड़ में पेड़ों से पुराने पत्तों का गिरना और इसके बाद नए पत्तों का आना बसंत के आगमन का सूचक है। इस प्रकार बसंत का मौसम जीवन में सकारात्मक भाव, ऊर्जा, आशा और विश्वास जगाता है। यह भाव बनाए रखने के लिए ज्ञान की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि ज्ञान और विद्या की देवी की पूजा के साथ बसंत ऋतु का स्वागत किया जाता है । माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी बसंत पंचमी के रूप में मनाई जाती है। यह बसंत ऋतु के आगमन का प्रथम दिन माना जाता है। यह दिन सरस्वती की जयंती के रूप में मनाया जाता है। इसे श्री पंचमी भी कहते हैं। इस दिन ज्ञान की प्राप्ति के लिए देवी सरस्वती की पूजा की परंपरा है। इस दिन माता सरस्वती, भगवान कृष्ण और कामदेव व रति की पूजा की परंपरा है ।बसंत को ऋतुओं का राजा अर्थात सर्वश्रेष्ठ ऋतु माना गया है। इस समय पंच-तत्त्व अपना प्रकोप छोड़कर सुहावने रुप में प्रकट होते हैं। पंच-तत्त्व- जल, वायु, धरती, आकाश और अग्नि सभी अपना मोहक रूप दिखाते हैं। आकाश स्वच्छ है, वायु सुहावनी है, अग्नि (सूर्य) रुचिकर है तो जल! पीयूष के समान सुखदाता! और धरती! उसका तो कहना ही क्या वह तो मानों साकार सौंदर्य का दर्शन कराने वाली प्रतीत होती है! ठंड से ठिठुरे विहंग अब उड़ने का बहाना ढूंढते हैं तो किसान लहलहाती जौ की बालियों और सरसों के फूलों को देखकर नहीं अघाता! धनी जहाँ प्रकृति के नव-सौंदर्य को देखने की लालसा प्रकट करने लगते हैं तो निर्धन शिशिर की प्रताड़ना से मुक्त होने के सुख की अनुभूति करने लगते हैं।
बसंत ऋतु का आगमन बसंत पंचमी पर्व से होता है। शांत, ठंडी, मंद वायु, कटु शीत का स्थान ले लेती है तथा सब को नवप्राण व उत्साह से स्पर्श करती है। पत्रपटल तथा पुष्प खिल उठते हैं। स्त्रियाँ पीले- वस्त्र पहन, बसंत पंचमी के इस दिन के सौन्दर्य को और भी अधिक बढ़ा देती हैं। लोकप्रिय खेल पतंगबाजी, बसंत पंचमी से ही जुड़ा है। यह विद्यार्थियों का भी दिन है, इस दिन विद्या की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की पूजा आराधना भी की जाती है।
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रविवार, फ़रवरी 02, 2014

जीवन ...



प्रतिकूल  / पनपते  ,पतझड़ में !
मधुमास महकते  आते   हैं !
संघर्षों  की / कठिन  शिला पर !
सूरज / शूर  जलाते  है !!
------------------------------  डॉ. प्रतिभा स्वाति 
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