रविवार, मई 11, 2014

चित्र / मित्र


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 सच / कहूँ तो !
चित्र / विचित्र हैं !

रिझाते  हैं / कभी 
उकसाते हैं .......
जाने क्या - क्या ,
कह जाते हैं !

कई बार / हम 
कहते हैं / अपने गम !

और / कई बार /ये काम ,
ये / चित्र कर जाते हैं !
जब / उनमें / आपके ,
रंग / भर जाते हैं !

कई बार/ चित्र , 
शब्द हो जाते  हैं !
कहानी बन जाते हैं !

उनकी / चुम्कीय शक्ति ,
खीचती है / अपनी ओर !
महीन - सी........... डोर !
जिसका....ओर न छोर !

चित्र - शब्द / शब्द -चित्र !
ओह ! मेरी / अभिव्यक्ति !
क्यूँ ..... इतनी नाकारा है  ?
कई बार ...... स्वीकारा है !

अनुभूति ...... खामोश है !
सब ........... मेरा दोष है ! 

 लिखने पे / खुलासा होता है !
अनचाहा / अनकहा  भी !
लिखने का ......... अंदाज़ !
चित्र / कई बार / छुपाते हैं ,
हलके रंगों में / गहरे राज़  !

थोड़े में कहूँ / या ज्यादा में !
बात / कह नहीं पाती हूँ !
और कहे बिना........ जब ,
 मैं..........रह नहीं पाती हूँ !

तब खोजती हूँ / निगाहों से ,
अपने....... परम -मित्र को  !
अभिव्यक्ति  में  माहिर,
अनुकूल ........... चित्र  को !
--------------------------------- डॉ . प्रतिभा स्वाति
     




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