गुरुवार, नवंबर 07, 2013

चाँद

रात भर ,
करता रहा ,
वो फ़रियाद !

रात ख़ामोश !
सितारे चुप !!
मै भी आख़िर ,
क्या देती जवाब ?


जब लिया ,
हाथों में चाँद !
पोछ दिया आज ,
उसके,
माथे का दाग !

ज़िन्दगी के,
 अंधेरों से,
लेकर काजल ,
लगा दिया डिठौना !

और / पूछ लिया ,
मुस्कुराके आज !
हर अमावस पे ,
उसके / गायब ,
होने का राज़ !!
-------------------------- डॉ . प्रतिभा स्वाति


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