मंगलवार, सितंबर 03, 2013

या देवी सर्वभूतेषु ...

 या देवी सर्वभुतेषु मातृरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥


  या देवी सर्वभुतेषु मातृरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥
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  हाइकू_____________________


     कहा  न  सुना !
   बात ही का  बवाल !
   हुआ  बेहाल !
 ---------------------------  डॉ . प्रतिभा  स्वाति
( हाइकू तो  बाल की खाल निकालने जैसा खेल है , बस शुरुआत होनी चाहिए / वज़ह चाहे कुछ हो --------- आपके पास 3 लाइन हैं / और 17 की अक्षर सीमा ! बात पूरी ना भी हो , खेल में शरीक अगला बंदा उसे अपनी तर्ज़ और अपनी शक्ल देगा ----------- जैसे हम ,अन्त्याक्षरी में गाने का आखरी अक्षर थामकर / शुरू हो जाते हैं _______ लगभग उसी तरह यहाँ शब्द -शब्द को तराशने का हुनर आना चाहिए :) और एक सीमा भी तय ,अपनी बात 17 में हो 3 लाइन में हो ! )



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